
कुरुद।
पूर्व मंत्री एवं विधायक Ajay Chandrakar ने एक कार्यक्रम में राजनीतिक नेरेटिव और नकारात्मक सोच को लेकर तीखे अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुपोषण तीन प्रकार का नहीं, बल्कि चार प्रकार का होता है। एक और जोड़ लीजिए—मानसिक कुपोषण। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने नेरेटिव तैयार किए जाने की राजनीति पर सवाल उठाया और चुनाव आयोग से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया।
‘Ajay Chandrakar का ‘मानसिक कुपोषण’ वाला तंज
चंद्राकर ने कहा कि नेरेटिव किस तरह तैयार होता है, इसका उदाहरण हालिया घटनाक्रम में देखने को मिला। उनके अनुसार, दो दिन में ही मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और महाभियोग लाने तक की बात पहुंच गई, लेकिन “सिर्फ दो दिन में हवा निकल गई।”
उन्होंने कहा कि किसी विषय को पूरी तरह समझे बिना उसके आधार पर राजनीतिक नेरेटिव तैयार करना उचित नहीं है। उनके संबोधन का केंद्र यही था कि किसी भी घटनाक्रम को उसके वास्तविक संदर्भ के साथ समझना चाहिए।
14 बिंदुओं और अधिकारी की प्रतिनियुक्ति का जिक्र
विधायक ने कहा कि बाद में संबंधित आयुक्तों ने स्पष्ट किया कि 14 बिंदुओं में उनकी कोई असहमति नहीं थी। उन्होंने कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र का भी उल्लेख किया।
चंद्राकर के अनुसार, यह पत्र एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति के विषय में लिखा गया था। उन्होंने कहा कि आयोग की कार्यशैली में फैसले सर्वसम्मति से होते हैं और संबंधित फैसले भी सर्वसम्मति से हुए।
इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि जब पत्र का विषय एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति से संबंधित था और फैसले सर्वसम्मति से हुए, तो इसे लेकर इतना बड़ा नेरेटिव कैसे तैयार हो गया।
‘Nation First’ पर जोर
चंद्राकर ने राजनीतिक नकारात्मकता को भी अपने संबोधन का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के दिमाग में नकारात्मकता आ जाए और उसका चिंतन देश के बजाय लगातार किसी एक राजनीतिक दल की गतिविधियों के विरोध तक सीमित हो जाए, तो देश के बारे में सोच पीछे छूट जाती है।
उन्होंने “Nation First” का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र के बारे में चिंतन होना चाहिए। देश की गतिविधियों और देश की समस्याओं पर दृष्टिकोण रखना चाहिए। उनके अनुसार, यदि राजनीतिक सोच केवल विरोध तक केंद्रित हो जाए तो राष्ट्र के बारे में सकारात्मक चिंतन प्रभावित होता है।
पुराने घोटालों का भी किया उल्लेख
चंद्राकर ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती राजनीतिक दौर का उल्लेख करते हुए 2G स्पेक्ट्रम और राष्ट्रमंडल घोटाले का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी परिस्थितियों से मुक्त होना चाहिए और राजनीतिक चिंतन का केंद्र राष्ट्र होना चाहिए।
Gen Z की भाषा पर भी टिप्पणी
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने Gen Z की बदलती भाषा और बोलचाल के अंदाज का भी जिक्र किया। नए शब्दों और शॉर्ट फॉर्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि केवल अलग तरह की भाषा या नए शब्दों का इस्तेमाल करना अपने आप में स्मार्टनेस नहीं है।
‘दो दिन में हवा निकल गई’ पर रहा जोर
पूरे संबोधन में चंद्राकर ने राजनीतिक नेरेटिव और नकारात्मक सोच के मुद्दे को केंद्र में रखा। चुनाव आयोग से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके अनुसार, जिस मुद्दे पर इस्तीफे और महाभियोग तक की बात पहुंच गई, उसी विषय पर बाद में संबंधित आयुक्तों की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई।

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