
कुरूद।
पुरानी मंडी में आयोजित संकल्प सेवा अभियान एवं आनंद मेला सम्मेलन में Ajay Chandrakar Kurud कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर मुखर नजर आए। उन्होंने कहा, “आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता को फटकारना और हाजिरी लेना आसान है, मेरी भूमिका पंखा लगवाना और बोरिंग की व्यवस्था करना है।” उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष की नकारात्मक राजनीति पर भी निशाना साधा।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस दौरान महिला स्व-सहायता समितियों और स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों का निरीक्षण भी किया गया।
Ajay Chandrakar Kurud में बोले- जनप्रतिनिधि की असली भूमिका क्या है?
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर बात करते हुए चंद्राकर ने आंगनबाड़ी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता को फटकारना और हाजिरी लेना आसान है, लेकिन जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल कमियां तलाशना नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मेरी भूमिका क्या है? मेरी भूमिका का मतलब है कि मैंने पंखा लगवा दिया, बोरिंग की व्यवस्था करा दी।”
उन्होंने समाधान और बुनियादी सुविधाओं को जनप्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि जनता की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था उपलब्ध कराना जरूरी है।
राष्ट्र प्रथम और अंत्योदय को लेकर क्या बोले?
अजय चंद्राकर ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अंत्योदय की अवधारणा को जनसेवा से जोड़ते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही।
उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
महिलाओं के लिए महतारी सदन क्यों अहम?
महिला सशक्तिकरण पर उन्होंने स्व-सहायता समूहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने महिलाओं के पारंपरिक कौशल को प्रशिक्षण और बाजार से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने की बात कही।
उन्होंने बड़े करेली में मुख्यमंत्री द्वारा महतारी सदन के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए इसे महिलाओं की गतिविधियों का केंद्र बनाने की बात कही। कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समितियों और स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों का निरीक्षण भी किया गया।
केवड़िया से 2036 ओलंपिक तक क्या बताया विकास का विजन?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए चंद्राकर ने केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जहां पहले वीरानी थी, वहां दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बनाई गई और वह पर्यटन का केंद्र बनी।
उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लागत 5 से 10 साल के भीतर पर्यटन से निकल गई। साथ ही अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक के लिए भारत की ओर से किए गए आवेदन का उल्लेख किया।
कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति पर क्या बोले?
अपने संबोधन में उन्होंने राजनीतिक नकारात्मकता पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सोच में नकारात्मकता हावी हो जाती है तो व्यक्ति देश और समाज के बारे में सोचने के बजाय किसी दल के विरोध को ही अपना केंद्र बना लेता है।
उन्होंने बिना मुद्दे और विचार के तात्कालिक प्रतिक्रिया देने तथा हर विषय में गलती तलाशने को नकारात्मक राजनीति से जोड़ा। उन्होंने राष्ट्रहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखने की बात कही।
उन्होंने 2G स्पेक्ट्रम और राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े घोटालों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्षों में भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा।
कुपोषण और स्कूल ड्रॉपआउट पर भी चिंता
चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ में स्कूल ड्रॉपआउट और माताओं में कुपोषण को चुनौती बताते हुए आंगनबाड़ी और पोषण कार्यक्रमों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों से निपटने में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जब समाज की चेतना जागती है तो परिवर्तन की प्रक्रिया तेज होती है। सेवा, राष्ट्रहित और जनभागीदारी को उन्होंने समाज निर्माण का आधार बताया।
कार्यक्रम में कौन-कौन रहा मौजूद?
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष निरंजन सिन्हा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष गोकर्ण साहू, जनपद अध्यक्ष गीतेश्वरी साहू, जनपद अध्यक्ष वीरेंद्र साहू, मंडल अध्यक्ष त्रिलोकचंद्र जैन, मेघा साहू, सिंधु बैस, जिला पंचायत सदस्य पूजा सिन्हा, कुलेश्वरी साहू, सुनील गायकवाड़, सुशीला निर्मलकर, मोंगरा साहू और पुष्पा साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रशासनिक स्तर पर नायब तहसीलदार रामकुमार सिन्हा, सीईओ अमित सेन, परियोजना अधिकारी सुमित गाड़ेंचा, सुपरवाइजर सोमलता शुक्ला, रेणुका और जय श्री साहू सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मितानिन उपस्थित रहीं।
Ajay Chandrakar Kurud के इस संबोधन में जनप्रतिनिधित्व, राष्ट्र प्रथम, अंत्योदय, महिला सशक्तिकरण और जनभागीदारी के साथ राजनीतिक नकारात्मकता का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
