वन्देमातरम परिवार और बोल बम सेवा समिति बनी बेसहारा आत्माओं का सहारा, पुलिस की मौजूदगी में हिन्दू मुक्तिधाम में हुआ कफन-दफन

कुरूद (धमतरी), 29 अक्टूबर। न कोई अपना, न कोई पहचान, फिर भी विदाई पूरे सम्मान के साथ। गुरुवार को मूसलाधार बारिश के बीच कुरूद लावारिस शव अंतिम संस्कार की यह मानवीय पहल वन्देमातरम परिवार और बोल बम सेवा समिति ने विधि-विधान से पूरी की। समिति द्वारा सद्गति दिया गया यह 76वाँ लावारिस शव है।
महानदी मुख्य नहर के पास मिला था अज्ञात शव
बिरेझर पुलिस चौकी से मिली जानकारी के अनुसार, महानदी मुख्य नहर के गेट क्रमांक 3 के पास एक अज्ञात शव मिला था। मृतक की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष आंकी गई है। पुलिस की शिनाख्त की कोशिशों के बावजूद जब कोई परिजन सामने नहीं आया, तब चौकी की अनुमति से समिति ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।
हिन्दू मुक्तिधाम में हुआ लावारिस शव का अंतिम संस्कार
कुरूद के हिन्दू मुक्तिधाम में पुलिस स्टाफ की मौजूदगी में कफन-दफन की प्रक्रिया पूरी की गई। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और “राम नाम सत्य है” के उद्घोष के साथ अंतिम विदाई दी।
बोल बम सेवा समिति और पुलिस टीम रही मौजूद
समिति की ओर से अध्यक्ष भानु चन्द्राकर, उपाध्यक्ष नंद आमदे, कोषाध्यक्ष भारत साहु तथा सदस्य कृष्णा ढीमर, सीताराम, राजा चन्द्राकर, रवि यादव, गोविन्दा और अमित कुमार मौजूद रहे। पुलिस विभाग से ASI इशु साहु, प्रधान आरक्षक महेश पटेल, आरक्षक नैनदास बाँधे, पुलिस स्टाफ शैलेन्द्र साहु और डॉ. गौरव नेताम भी उपस्थित रहे।
समिति अध्यक्ष भानु चन्द्राकर ने इस पुण्य कार्य में सहभागी बने सभी सदस्यों, पुलिस स्टाफ, चिकित्सकों और सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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अब तक 76 अज्ञात आत्माओं को मिली सद्गति
बोल बम सेवा समिति और वन्देमातरम परिवार का यह अभियान क्षेत्र में मानवता की मिसाल बन चुका है। कुरूद में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की इस सेवा के तहत अब तक 76 अज्ञात आत्माओं को सम्मानजनक विदाई दी जा चुकी है। समिति ने साबित किया है कि सेवा का कोई मौसम नहीं होता।

BREAKING NOW के संस्थापक-संपादक मूलचंद सिन्हा धमतरी जिले और कुरूद क्षेत्र की स्थानीय खबरों, राजनीति, प्रशासन और विकास से जुड़े मुद्दों को तथ्यों के साथ सामने लाते हैं। उनका उद्देश्य जिम्मेदार और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाना है।
