धमतरी निदान-03 शिविर: हादसे में पैर गंवाने वाले ईश्वर नेताम को मिली नई उम्मीद

 

मजदूर माता-पिता के बेटे ने मुश्किलों के बीच जारी रखी पढ़ाई, कृत्रिम पैर मिलने से आत्मनिर्भर बनने के सपने को मिले पंख

 

धमतरी के झुरातराई निवासी ईश्वर नेताम को निदान-03 शिविर में कृत्रिम पैर लगने के बाद चलते हुए और पहले बैसाखी के साथ बैठे हुए
धमतरी: सड़क हादसे में पैर गंवाने वाले झुरातराई के ईश्वर नेताम को सेवा संकल्प अभियान के ‘निदान-03’ शिविर में कृत्रिम पैर मिला। बाएं – कृत्रिम पैर के सहारे चलने का अभ्यास, दाएं – पहले की स्थिति।

धमतरी, 12 अक्टूबर। गरीबी ने राह मुश्किल की, लेकिन ईश्वर नेताम ने हिम्मत नहीं हारी। सड़क हादसे में उन्होंने अपना एक पैर गंवा दिया। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। मजदूर माता-पिता का बेटा स्कूल जाता रहा। उसका सपना पढ़ाई पूरी कर परिवार का सहारा बनना है।

अब सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित धमतरी निदान-03 शिविर में उन्हें कृत्रिम पैर मिला है। इससे आत्मनिर्भर बनने की उनकी उम्मीद बढ़ी है। साथ ही, पढ़ाई जारी रखने का रास्ता भी आसान होने की उम्मीद है।

धमतरी निदान-03 शिविर से ईश्वर नेताम को मिली मदद

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर में ईश्वर नेताम को कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया गया। सड़क दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद उनके लिए रोजमर्रा के काम करना और पढ़ाई के लिए आने-जाने जैसी गतिविधियां चुनौतीपूर्ण हो गई थीं।

परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण महंगे कृत्रिम पैर की व्यवस्था करना आसान नहीं था। ऐसे में शिविर के माध्यम से मिली सहायता ने उनके जीवन में आगे बढ़ने की नई संभावना पैदा की है।

हादसे के बाद भी पढ़ाई जारी रखने का संकल्प

ईश्वर के माता-पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई और बेहतर भविष्य की उम्मीद नहीं छोड़ी। ईश्वर भी कठिन परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय शिक्षा पूरी करने के अपने लक्ष्य पर डटे रहे।

उनका सपना पढ़ाई पूरी कर आत्मनिर्भर बनना और माता-पिता के संघर्ष में सहभागी बनना है। कृत्रिम पैर मिलने से अब उन्हें अपनी दैनिक गतिविधियों और पढ़ाई जारी रखने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है।

कृत्रिम पैर से आत्मनिर्भर बनने की नई उम्मीद

ईश्वर नेताम ने इस सहयोग के लिए जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके लिए यह मदद कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का संबल है।

धमतरी निदान-03 शिविर के माध्यम से मिली सहायता यह संदेश देती है कि समय पर सहयोग और उचित संसाधन मिलने से दिव्यांगजन के लिए आत्मनिर्भरता की राह आसान हो सकती है। ईश्वर की संघर्षगाथा भी इसी विश्वास को मजबूत करती है कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, हौसला और अवसर मिलकर भविष्य की नई राह बना सकते हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!