कुरूद से धमतरी तक सियासी बिसात बिछा रहे लेखराम साहू? अरुण साव से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

उपमुख्यमंत्री अरुण साव से मुलाकात करते पूर्व विधायक लेखराम साहू
अरुण साव से मुलाकात कर धमतरी-कुरूद की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाते लेखराम साहू।

कुरूद।

कुरूद से धमतरी तक सियासी हलचल! पूर्व विधायक लेखराम साहू धमतरी-कुरूद विधानसभा क्षेत्रों की जर्जर सड़कों का मुद्दा लेकर उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव से मिले। इस मुलाकात के बाद कुरूद के साथ धमतरी में भी उनकी बढ़ती सक्रियता को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या यह महज जनसमस्याओं को उठाने की पहल है या किसी बड़ी रणनीति की शुरुआत? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

लेखराम साहू धमतरी-कुरूद में क्यों बढ़ा रहे सक्रियता?

कुरूद के पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय समन्वयक, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस, नई दिल्ली, लेखराम साहू ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव से मुलाकात कर धमतरी और कुरूद विधानसभा क्षेत्रों की बदहाल सड़कों की समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रमुख मार्गों की स्थिति बेहद जर्जर हो चुकी है, जिससे आम जनता, विद्यार्थियों और किसानों को परेशानी हो रही है।

इस मुलाकात की खास बात यह रही कि मांगें केवल कुरूद तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि धमतरी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण मार्गों को भी प्रमुखता से उठाया गया।

लेखराम साहू ने अरुण साव से मिलकर उठाया सड़कों का मुद्दा

लेखराम साहू ने मंत्री को बताया कि कई गांवों को जोड़ने वाले मार्गों की हालत खराब होने से ग्रामीणों को रोजाना दिक्कत झेलनी पड़ रही है। उन्होंने संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझने के बाद सड़क सुधार की मांग रखी।

उन्होंने आग्रह किया कि जर्जर सड़कों की मरम्मत और नए निर्माण कार्यों को जल्द स्वीकृति दी जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।

धमतरी-कुरूद की इन पांच सड़कों के सुधार की मांग

लेखराम साहू ने जिन ग्रामीण मार्गों की समस्या रखी, उनमें शामिल हैं:

– शंकरदाह-डोडकी से बोड़रा पहुंच मार्ग

– छाती से गागरा-कंडेल पहुंच मार्ग

– अंवरी से सोनपुर पहुंच मार्ग

– थूहा से बंगोली पहुंच मार्ग

– भैंसबोड़ से मड़ेली पहुंच मार्ग

उनके अनुसार, इन मार्गों पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से स्थिति और खराब हुई है। ये रास्ते कई गांवों को जोड़ते हैं, इसलिए टिकाऊ निर्माण जरूरी है।

खराब सड़कों का असर विद्यार्थियों और किसानों पर भी पड़ रहा है। विद्यार्थियों को कुरूद, धमतरी के हायर सेकेंडरी स्कूलों तक पहुंचने में दिक्कत होती है, वहीं धान खरीदी के दौरान किसानों को बेहतर सड़कों की जरूरत होगी।

धमतरी-कुरूद की राजनीति में क्या है आगे की रणनीति?

राजनीतिक लिहाज से इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस से जुड़े पूर्व विधायक का भाजपा सरकार के उपमुख्यमंत्री से मिलकर क्षेत्रीय समस्या उठाना चर्चा का विषय बना है।

सवाल है कि क्या लेखराम साहू कुरूद के साथ धमतरी में भी जनसंपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं? फिलहाल इन संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, लेकिन किसी भावी राजनीतिक योजना की पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीति में जनहित की पहल या सियासी संकेत?

अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच मुलाकातों पर चर्चा होना आम है। एक ओर कांग्रेस से जुड़ाव, दूसरी ओर भाजपा सरकार के मंत्री के सामने बुनियादी समस्या रखना—इसे जनहित की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है।

इसका सही आकलन उनकी आगामी गतिविधियों और दोनों क्षेत्रों में सक्रियता से ही हो सकेगा।

लेखराम साहू की अगली राजनीतिक चाल पर निगाहें

फिलहाल क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि शासन स्तर से सड़कों पर जल्द कार्रवाई होगी। सियासत में मुलाकातें और कयास चलते रहते हैं, लेकिन कुरूद के साथ धमतरी भी उनकी प्राथमिकता में रहेगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

 

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