धमतरी।
एक मासूम की नाले में डूबने से मौत के बाद ‘लक्ष्य सेतु’ नामकरण की घोषणा हुई। लेकिन धमतरी में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक और सवाल सामने है।
मकेश्वर वार्ड की शासकीय प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी के पास खुला नाला बच्चों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। यहां से 43 स्कूली और 12 आंगनबाड़ी बच्चों सहित कुल 55 बच्चे रोजाना आवाजाही करते हैं।
स्कूल भवन से सटा है खुला नाला
स्कूल भवन के पास नाला कई जगह खुला है। कुछ हिस्सों पर स्लैब है। वहीं कई हिस्से अब भी खुले पड़े हैं।
नाले के आसपास गंदा पानी, कचरा और मलबा भी नजर आता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इसके अलावा, खुले नाले से जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बताया जा रहा है।
लक्ष्य की मौत के बाद सवाल और गंभीर
धमतरी शहर में नाले में डूबने से बच्चे लक्ष्य साहू की मौत के बाद निगम और जनप्रतिनिधियों ने मौके का जायजा लिया था। इसके बाद व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई।
इसी क्रम में नए बनने वाले पुलिया का नाम ‘लक्ष्य सेतु’ रखने की घोषणा की गई।
लेकिन मकेश्वर का मामला यह सवाल खड़ा करता है कि हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय ऐसे स्थानों को पहले से सुरक्षित क्यों नहीं किया जाता?
शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान का इंतजार
स्कूल से जुड़ी मोनिका साहू के अनुसार, खुले नाले को लेकर कई बार DEO कार्यालय में शिकायत की गई है।
उनका कहना है कि समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि नाले से जुड़े खतरे के साथ स्कूल परिसर में सांप भी प्रवेश कर चुके हैं।

नगर निगम ने क्या कहा?
नगर निगम आयुक्त अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि स्कूल, आंगनबाड़ी और अन्य संवेदनशील स्थानों की पहचान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि खुले नालों को ढंकने या उनकी ऊंचाई बढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को नाले तक आसानी से पहुंचने से रोकना है।
👉
नारी पुल पर शराब की बोतलें और उमड़ी भीड़, बाढ़ के बीच सामने आया हैरान करने वाला नजारा
👉
कुरूद के डंडेसरा में पुलिस का बड़ा एक्शन, 4 युवकों से कराया गुंडागर्दी नहीं करने का संकल्प
सवाल सिर्फ मकेश्वर के नाले का नहीं
मकेश्वर का यह मामला केवल एक स्कूल के आसपास की समस्या नहीं है। यह उन सभी स्थानों की सुरक्षा का सवाल है, जहां रोजाना बच्चे गुजरते हैं।
धमतरी को सिर्फ ‘लक्ष्य सेतु’ नहीं, सुरक्षित सेतु चाहिए। नाम बदलने से पहले नाले ढंकने होंगे। क्योंकि बच्चों की सुरक्षा किसी हादसे के बाद नहीं, उससे पहले सुनिश्चित होनी चाहिए।
मकेश्वर स्कूल के 55 बच्चों के अभिभावकों के लिए सवाल सीधा है—बच्चा स्कूल जाए तो सुरक्षित लौटे, यह भरोसा व्यवस्था कब देगी?
