Kurud Rashtra Chintan Samvad: “हारो तो ईवीएम खराब, यह लोकतंत्र का अपमान”, अजय चंद्राकर बोले, “असली वोट चोरी 1975 में हुई थी”

मंगल भवन में बौद्धिक संवाद का महाकुंभ, चुनाव आयोग, ईवीएम, एसआईआर और आपातकाल पर वक्ताओं ने विपक्ष को घेरा

Kurud Rashtra Chintan Samvad में मंगल भवन कुरूद में दीप प्रज्वलित करते अतिथि
कुरूद के मंगल भवन में आयोजित राष्ट्र चिंतन संवाद में दीप प्रज्वलित करते अतिथि।

कुरूद, 2 नवंबर। Kurud Rashtra Chintan Samvad का आयोजन नगर पालिका परिसर स्थित मंगल भवन में सोमवार शाम हुआ। “विचारों का मंथन, राष्ट्र निर्माण का संकल्प” के ध्येय वाक्य के साथ हुए इस बौद्धिक संवाद में वक्ताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, ईवीएम, एसआईआर, आपातकाल और देश की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर खुलकर विचार रखे। सभी का सार यही रहा कि संविधान को केवल हाथ में उठाने से नहीं, उसे आचरण में जीने से देश चलेगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने भारत माता के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इसके साथ ही सभागार “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के उद्घोष से गूंज उठा।

 Kurud Rashtra Chintan Samvad के मंच पर प्रबुद्धजनों का संगम

मंच पर अधिवक्ता एल.पी. गोस्वामी, नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर, जनपद पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र साहू, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रविकांत चंद्राकर, कवींद्र जैन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष गोकर्ण साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष गीतेश्वरी साहू, रोहिताश मिश्रा, नवल केला, मंडल अध्यक्ष कल्याण सिंह राजपूत और डॉ. लोकेश साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे।

“2023 तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कोई कानून ही नहीं था”

संवाद के मुख्य वक्ता पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि आज देश में चुनाव हारने पर ईवीएम को दोष देने और वोट चोरी का आरोप लगाने का नया फैशन बन गया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सबसे बड़ा अपमान है। उन्होंने कहा कि विपक्ष आज चुनाव आयोग को ज्ञान बाँट रहा है, जबकि 2023 तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कोई कानून ही नहीं था। 2023 का कानून सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बना। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों के उदाहरण गिनाए:

रमा देवी मुख्य चुनाव आयुक्त पद के बाद राज्यसभा की महासचिव बनीं और बाद में राज्यपाल भी रहीं।

एम.एस. गिल कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा सदस्य और केंद्र में खेल मंत्री बने।

चुनाव सुधारों का श्रेय पाने वाले टी.एन. शेषन ने कांग्रेस के टिकट पर गांधीनगर से आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा।

सबसे बड़ा उदाहरण नवीन चावला का बताते हुए चंद्राकर ने कहा कि आपातकाल के दौरान वे दिल्ली के उपराज्यपाल के सचिव थे और शाह आयोग ने उन पर टिप्पणी की थी। चंद्राकर ने दावा किया कि उस दौरान 205 सांसदों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था और तत्कालीन चुनाव आयुक्त गोपालस्वामी ने भी आपत्ति जताई थी, फिर भी चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया। उन्होंने सवाल किया, “तब लोकतंत्र खतरे में नहीं था?”

उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर 1952 से लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

ईवीएम पर “हैक करके दिखाओ, आज तक कोई नहीं कर पाया”

ईवीएम पर चंद्राकर ने कहा कि 1982 में केरल में पहली बार ईवीएम से चुनाव हुआ और 2004 से पूरे देश में इसी से मतदान हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि जब भाजपा जीतती है तो ईवीएम हैक होती है, लेकिन निर्वाचन आयोग की खुली चुनौती है कि ईवीएम हैक करके दिखाओ, और आज तक कोई भी राजनीतिक दल इस चुनौती को स्वीकार करने सामने नहीं आया। उन्होंने तर्क दिया कि 2004 में इसी ईवीएम से अटल जी की सरकार चली गई और यूपीए 10 साल रही, तब ईवीएम ठीक थी। 2024 में भाजपा 303 से 240 सीटों पर आई, “तो अगर ईवीएम जिताती है, तो सीटें कम कैसे हुईं?”

एसआईआर पर “नीचे काम नहीं, दिल्ली में हल्ला”

वक्ताओं ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है और कांग्रेस के शासनकाल में भी कई बार हुई है। चंद्राकर ने दावा किया कि केरल के कांग्रेस नेता शशि थरूर और यूडीएफ के एक मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि एसआईआर से एलडीएफ के फर्जी वोट कटे, जिससे उन्हें जीत मिली। बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एसआईआर शुरू होने पर ममता सरकार ने कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं कराए और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।

वक्ताओं ने बूथ स्तर की व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि बूथ पर जाने वाले प्रतिनिधि को बीएलए-2 कहा जाता है। उनके अनुसार छत्तीसगढ़ में करीब 27 हजार बूथ हैं, जिनमें से कांग्रेस ने केवल 17 हजार पर बीएलए की नियुक्ति की, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ने शून्य और आम आदमी पार्टी ने 18 बूथों पर नियुक्ति की। वक्ताओं ने सवाल उठाया, “नीचे काम नहीं करना और दिल्ली जाकर हल्ला करना, यह कौन सी राजनीति है?”

 “आयोग का कोई स्थायी कर्मचारी नहीं”: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मिश्रा

Kurud Rashtra Chintan Samvad के मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर मिश्रा ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित चुनावी प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी और संवैधानिक है। उन्होंने कहा कि आयोग का कोई स्थायी कर्मचारी नहीं होता। दिल्ली से लेकर रायपुर और नीचे पटवारी-शिक्षक तक सभी प्रतिनियुक्ति पर आते हैं, ताकि मिलीभगत की गुंजाइश न रहे। उन्होंने इसे बाबा साहब आंबेडकर की सोच बताया। उन्होंने कहा कि मुख्य आयुक्त के चयन में चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष की भागीदारी होती है। उनके अनुसार पार्टियों के प्रतिनिधियों की भागीदारी और बूथ स्तर पर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मिश्रा ने कहा कि विपक्षी दल सक्रिय भागीदारी के बजाय केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ स्तर पर एजेंटों की नियुक्ति और सत्यापन में कांग्रेस उदासीन रही है और आंतरिक बैठकों में आपत्ति दर्ज न कराकर बाहर माहौल खराब करने का प्रयास किया जाता है।

“असली वोट चोरी 1975 में हुई”: आपातकाल पर चंद्राकर

आपातकाल का जिक्र करते हुए चंद्राकर ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध ठहराया, तब हजारों विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया तथा प्रेस, न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 39वें संशोधन से प्रधानमंत्री को न्यायिक समीक्षा से बाहर कर दिया गया, और 42वें संशोधन में संविधान में “समाजवाद” शब्द जोड़ा गया, जो बाबा साहब की इच्छा के विरुद्ध था।

देश को अस्थिर करने की साजिश का आरोप

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मिश्रा और अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और विदेशी फंडिंग के जरिए देश को अस्थिर करने की सुनियोजित कोशिश हो रही है। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह नेपाल और श्रीलंका में माहौल बिगाड़कर सत्ता परिवर्तन कराया गया, वैसा ही प्रयोग भारत में दोहराने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के सर्वर विदेश में हैं, इसलिए राष्ट्रवादी पोस्ट दब जाती हैं और अभद्र व आपत्तिजनक भाषा वाली पोस्ट तेजी से वायरल होती हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी संकट के दौरान पाकिस्तान में पेट्रोल कई गुना महंगा हो गया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में असर 10-15 प्रतिशत तक सीमित रहा।

चंद्राकर ने इजराइल का उदाहरण देते हुए कहा कि चारों ओर दुश्मनों से घिरे उस देश में भी “राष्ट्र प्रथम” ही मुद्दा है, जबकि यहाँ सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डोकलाम के समय नेता प्रतिपक्ष चीनी राजदूत से मिलने पहुँचे। उन्होंने यह भी कहा कि देश के 42 सेवानिवृत्त जजों और पूर्व सचिवों ने चुनाव आयोग के समर्थन में पत्र लिखा है। आंतरिक सुरक्षा और घुसपैठ की समस्या पर चिंता जताते हुए वक्ताओं ने “राष्ट्र प्रथम” की विचारधारा अपनाने का आह्वान किया।

संकल्प के साथ Kurud Rashtra Chintan Samvad का समापन

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और उपस्थितजनों ने संकल्प लिया कि असहमति लोकतंत्र की आत्मा है और उसका सम्मान किया जाएगा, लेकिन असहमति के नाम पर अराजकता, संवैधानिक संस्थाओं पर हमला या देश को कमजोर करने की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। 2047 तक भारत को विकसित और विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाना सभी का लक्ष्य बताया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, व्यापारी, शिक्षक, किसान और युवा उपस्थित रहे।

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